Tuesday, 13 October 2015

न ही F में नाम न ही गवाहों के बयानं, फिर भी भगत सिंह को दे दी फ़ासी !

लाहौर में 1928 मे ब्रिटिश पुलिस अधिकारी की हत्या में भगत सिंह का नाम प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में दर्ज नहीं था। भगत को फांसी दिए जाने के 83 साल बाद यह बात सामने आई है, जिससे उनकी बेगुनाही साबित करने के लिए यह एक बहुत बड़ा सबूत है।
भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के अध्यक्ष इम्तियाज रशीद कुरेशी ने याचिका दायर कर तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जॉन पी सौंडर्स की हत्या करने के आरोप में भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव के खिलाफ दर्ज एफआईआर की सत्यापित कॉपी मांगी थी।
भगत सिंह को सौंडर्स की हत्या करने के आरोप में फांसी की सजा दी गई थी और 1931 में लाहौर के शदनाम चौक में उन्हें फांसी दे दी गई थी। उस वक्त उनकी उम्र महज 23 साल थी।
उन्हें फांसी दिए जाने के आठ दशक से ज्यादा समय के बाद लाहौर पुलिस को कोर्ट ने भगत सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर ढूंढने का आदेश दिया था। आदेश के बाद अनारकली पुलिस स्टेशन का रिकॉर्ड खंगालने के बाद पुलिस को एफआईआर की कॉपी मिल ही गई।
उर्दू में लिखी एफआईआर 17 दिसंबर 1928 को शाम 4.30 बजे अनारकली पुलिस स्टेशन मे दो गुमनाम बंदूकधारियों के खिलाफ दर्ज की गई थी। थाने का ही एक पुलिस अधिकारी इस मामले में शिकायत कर्ता था।
शिकायतकर्ता पुलिस अधिकारी हत्या के मामले का प्रत्यक्षदर्शी भी था। अपनी रिपोर्ट में उसने कहा था कि जिस व्यक्ति का उसने पीछा किया था वह पांच फुट पांच इंच लंबा था, हिंदू चेहरा था, मूंछे थीं, दूबला पतला था और मजबूत काया था। उसने सफेद रंग का पायजामा और ग्रे शर्ट पहन रखा था। सिर पर टोपी भी पहनी हुई थी। मामला भारतीय दंड संहित (आईपीसी) 302, 1201 और 109 के तहत दर्ज किया गया था।
लाहौर पुलिस के विधि शाखा के इंसपेक्टर ने शनिवार को एफआईआर की सत्यापित कॉपी बंद लिफाफे में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (लाहौर) महमूद जारगम को सौंपी, जिसके बाद अदालत ने याचिकर्ता को भी एक कॉपी सौंपी।
कुरेशी ने बताया कि भगत सिंह मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश ने 450 प्रत्यक्षदर्शियों के बयान सुने बिना ही उन्हें (भगत) को फांसी की सजा दे दी। भगत के वकीलों को उनसे पूछताछ करने का मौका ही नहीं दिया गया।
कुरेशी ने लाहौर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर भगत सिंह मामले को पुन: खोलने की मांग की है। उन्होंने कहा, इस मामले में मैं भगत सिंह को निर्दोष साबित करना चाहता हूं। मामले की सुनवाई के लिए हाई कोर्ट ने मामला पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा है ताकि मामले की सुनवाई के लिए वृहत पीठ का गठन किया जा सके। Hindaun‪#‎bharatKaushikSharma‬

No comments:

Post a Comment